अंक- १०४6 Page-5

मैं प्रशासन से पूछना चाहता हूँ कि मेरे सम्पादक महोदय प्रखण्ड बीरनी काश एवं आँचल कार्यालय तक दौड़ते-दौड़ते इतने ही अस्वस्थ तथा दयनीय स्थिति में पहुँच गये है, कि कब उनके जिन्दगी की गाड़ी रुक जाए, उपर वाले के अलावा कोई नही जानता|