अंक- ११७० पेज २

02महंगाई से छुटकारा पाने के लिए रोज-व-रोज जुलुस मोर्चा लगाये जाते हैं लेकिन अब तक में महंगाई  को एक सूई भी टाटा नहीं सका है। भाषण बाजी और  नारे लगाने से मंहगाई से छुटकारा नहीं मिल सकता है। लेकिन इतनी समझ जनता में नहीं है अगर समझ होती तो अच्छे दिन के सपने कब के पूरे हो जाते। महंगाई की मार की बजह से रोज-व-रोज चोरी डकैती छिना-छपटी बढ़ती ही नजर आ रहे है। इसकी परवाह शायद सरकार को नहीं  है तभी सरकार बनने के बाद भी इस जंजल से कोई निकाल नहीं पाया। सिर्फ यहाँ भाषण बाजी में योजनाएँ ही बन रही है। योजनाओं का श्री गणेष कब होगी इसकी अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।