अंक- ११६२ पेज २

02ऐसा है हमारा हिन्दुस्तान|

विश्व में भारत उच्च महान||

शिक्षा नीति और विज्ञान|

सहने की शक्ति है जिसमे|

वो देशभक्त कहलाया  है||

अपने को नीचे करके किया था सम्मान|

कई थे जो रत्नो में एक रत्न|

विवेक, सुभाष, अंबेडकर वो अमन||

जाती-पाति का बंधन तोड़ा|

बनाया समाज को एक समान||

बड़े प्यार सा सींचा है सबने| ये प्यार भरा गौतम का चमन||

शांति, अमन का देश हमारा| गंगा, यमुना, सरस्वती की धारा||

जन-जन में नवयुग का ज्ञान| राम, कृष्ण अर्जुन का शान||

भारत में अब आबादी| दुख संकट से हुई बरबादी||

छीन, झपट और लूटपाट में| भारत का सम्मान घटा||

कुर्सी स्वार्थ के खेल में| झूँठा बोल का सिंघासन जुटा||

बिना रिश्वत का कम नही| रिश्वत बिना प्रमाण नही||

बड़े-बड़ों में खूब बढ़ा| ग़रीब-ग़रीबों में गिर रहा||

बिना रिश्वत का साइन नही| प्रशासन में जान नही||

प्रशासन को सब करो सलाम| तब होगा समस्या का निदान||